एक बार की बात है, आसमान में टिमटिमाते सितारों के बीच एक छोटा सा तारा था जिसका नाम लूमा था। बाकी सितारों की तरह लूमा बहुत बड़ा या चमकीला नहीं था, लेकिन उसका एक बहुत बड़ा सपना था—वह पूरे आकाश में सबसे तेज चमकना चाहता था!
हर रात, लूमा पूरी कोशिश करता कि वह ज्यादा से ज्यादा टिमटिमा सके। वह बड़े सितारों को चमकते देखता और सोचता, "एक दिन मैं भी सबसे ज्यादा चमकूंगा!"
लेकिन दूसरे सितारे हंसते थे। "तुम बहुत छोटे हो, लूमा," एक सितारे ने कहा। "तुम कभी भी हमारी तरह चमक नहीं पाओगे," दूसरे ने मजाक उड़ाया।
लूमा उदास हो गया लेकिन उसने हार नहीं मानी। वह चंद्रमा के पास सलाह लेने गया। बुद्धिमान चंद्रमा मुस्कुराया और कहा, "लूमा, सबसे बड़ा या सबसे चमकीला बनना जरूरी नहीं है। जरूरी यह है कि तुम अपने खास तरीके से चमको।"
लूमा ने चंद्रमा की बात पर विचार किया। उस रात, बाकी सितारों से आगे निकलने की कोशिश करने के बजाय, वह बस अपने तरीके से खुशी-खुशी टिमटिमाया।
फिर कुछ जादुई हुआ! धरती पर एक छोटी लड़की ने आसमान की ओर देखा और लूमा को टिमटिमाते देखा। "देखो मम्मी!" उसने खुशी से कहा, "वो तारा मुझे आंख मार रहा है!"
उस रात के बाद, लूमा उस छोटी लड़की का सबसे पसंदीदा तारा बन गया। अब उसे समझ आ गया था कि सबसे चमकीला बनने की जरूरत नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए चमकना जरूरी है जो तुम्हारी रोशनी को देखना चाहते हैं।
और फिर, लूमा खुशी-खुशी हमेशा टिमटिमाता रहा, यह जानते हुए कि वह जैसा है, वैसा ही खास है।
समाप्त।








