गाँव मोतीपुर में एक चतुर चाचा रहते थे। उनकी चतुराई के किस्से पूरे गाँव में मशहूर थे। लोग उनकी समझदारी और हाज़िरजवाबी के क़ायल थे। लेकिन सबसे मज़ेदार बात यह थी कि वो अपनी चतुराई से गाँव वालों को हँसाने का भी काम करते थे।
चतुर चाचा और आलसी लंगूर
एक दिन गाँव के बगीचे में एक लंगूर आकर बैठ गया। वह बहुत आलसी था और गाँववालों के फलों को तोड़कर आधा खाता और आधा फेंक देता। इससे सब परेशान थे।
गाँववालों ने चतुर चाचा से मदद माँगी। चाचा ने सोचा और कहा, "इस लंगूर को भगाने की ज़रूरत नहीं, इसे सबक सिखाने की ज़रूरत है!"
उन्होंने गाँव के बच्चों से कहा, "जब भी लंगूर कोई फल तोड़े, तुम सब ताली बजाना और हँसना।"
बच्चे वही करने लगे। लंगूर हैरान हो गया! उसे लगा कि उसकी हरकतें कोई मज़ाक बन गई हैं। वह शर्मिंदा होकर भाग गया और फिर कभी वापस नहीं आया।
चतुर चाचा की सीख
गाँव वाले बहुत खुश हुए। उन्होंने चाचा से पूछा, "आपने लंगूर को भगाया कैसे?"
चाचा मुस्कुराए और बोले, "कभी-कभी ताकत से नहीं, बल्कि अक्ल से ही काम लिया जाता है।"
सीख:
👉 किसी भी परेशानी को हल करने के लिए बुद्धि और समझदारी का इस्तेमाल करना चाहिए।
👉 हास्य और चतुराई से भी बड़ी समस्याओं को हल किया जा सकता है।
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