Saturday, March 22, 2025

अनोखा उपहार

 रवि एक छोटा लड़का था, जो अपने माता-पिता के साथ एक छोटे से गाँव में रहता था। वह बहुत ही चंचल और जिज्ञासु था। लेकिन एक चीज़ थी जो उसे सबसे ज्यादा पसंद थी—वह थी किताबें। गाँव में कोई लाइब्रेरी नहीं थी, इसलिए रवि को किताबें मिलने में बहुत मुश्किल होती थी।

एक दिन, जब वह खेतों के पास खेल रहा था, उसने एक बूढ़े बाबा को देखा, जो एक पेड़ के नीचे बैठे कुछ लिख रहे थे। रवि उनकी ओर बढ़ा और उत्सुकता से पूछ बैठा, "बाबा, आप क्या लिख रहे हैं?"

बाबा मुस्कुराए और बोले, "बेटा, मैं कहानियाँ लिखता हूँ।"

रवि की आँखें चमक उठीं। उसने उत्साहित होकर कहा, "क्या मैं आपकी कहानी पढ़ सकता हूँ?"

बाबा ने प्यार से सिर हिलाया और एक पुरानी, लेकिन सुंदर हस्तलिखित किताब उसे थमा दी। रवि खुशी-खुशी किताब लेकर घर भागा और पूरी रात उसे पढ़ता रहा।

अगले दिन, वह फिर बाबा के पास गया और बोला, "बाबा, आपकी कहानियाँ बहुत अद्भुत हैं! क्या मैं और पढ़ सकता हूँ?"

बाबा हँसे और बोले, "बिलकुल, लेकिन एक शर्त पर—तुम्हें भी एक कहानी लिखनी होगी और मुझे सुनानी होगी।"

रवि को यह चुनौती पसंद आई। उसने कागज़ और पेंसिल उठाई और अपनी पहली कहानी लिखने लगा। कुछ दिनों बाद, जब उसने बाबा को अपनी कहानी सुनाई, तो बाबा बहुत खुश हुए और बोले, "बेटा, यह तो बहुत अच्छी कहानी है! तुम एक दिन बड़े लेखक बनोगे।"

धीरे-धीरे, रवि ने कई कहानियाँ लिखीं, और गाँव के बच्चे भी उन्हें सुनने आने लगे। बाबा ने उसे किताबों का उपहार दिया और उसे लिखते रहने के लिए प्रेरित किया।

सालों बाद, रवि एक मशहूर लेखक बन गया। लेकिन वह कभी नहीं भूला कि उसकी यात्रा कहाँ से शुरू हुई थी—गाँव के एक पेड़ के नीचे बैठे उस बूढ़े बाबा से मिले अनोखे उपहार से।

समाप्त। 😊📖

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