गाँव में अर्जुन और वीर नाम के दो दोस्त रहते थे। वे इतने घनिष्ठ थे कि लोग उन्हें सगे भाइयों से भी बढ़कर मानते थे। वे साथ खेलते, साथ पढ़ते और एक-दूसरे की हर मुश्किल में मदद करते।
एक साल गाँव में भयंकर सूखा पड़ा। वीर के पिता बीमार पड़ गए, और उनके घर में अनाज की कमी हो गई। वीर को चिंता थी कि उसके परिवार के पास खाने के लिए कुछ नहीं बचा। अर्जुन ने यह देखा और चुपचाप रात में अपने घर से कुछ अनाज वीर के घर रख आया।
सुबह जब वीर ने अनाज देखा, तो वह चौंक गया। उसे समझ नहीं आया कि यह कहाँ से आया। उसी रात उसने भी अर्जुन के घर कुछ अनाज रख दिया, क्योंकि उसे पता था कि अर्जुन का परिवार भी मुश्किल में था।
अगली रात दोनों दोस्त फिर से एक-दूसरे के घर अनाज रखने गए और रास्ते में आमने-सामने आ गए! पहले तो वे हँस पड़े, फिर एक-दूसरे को गले लगा लिया।
गाँववालों को जब यह पता चला, तो वे भावुक हो गए। उन्होंने कहा, "सच्ची दोस्ती यही होती है, जहाँ कोई हिसाब नहीं, बस एक-दूसरे के लिए निस्वार्थ प्रेम होता है।"
सीख: असली भाईचारा खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि दिलों के रिश्तों से बनता है! ❤️🤝
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