Saturday, March 22, 2025

बुद्धिमान बंदर – जंगल का चालाक नायक

 घने जंगल में एक चतुर और चालाक बंदर रहता था, जिसका नाम बिरजू था। वह न सिर्फ तेज़ था, बल्कि अपनी चतुराई से हर मुश्किल का हल भी निकाल लेता था। जंगल के सभी जानवर उसकी अक्लमंदी के किस्से सुनाया करते थे। लेकिन एक दिन, उसके सामने एक बड़ी चुनौती आ गई।


भूखा मगरमच्छ और बिरजू की चालाकी

एक दिन, जंगल के किनारे नदी में रहने वाला एक बड़ा मगरमच्छ आया। वह भूखा था और बिरजू को देखकर सोचने लगा,
"अगर मैं इस बंदर को पकड़ लूं, तो कई दिन का खाना मिल जाएगा!"

मगरमच्छ ने चाल चली। वह नदी के किनारे एक पत्थर की तरह लेट गया, ताकि बिरजू को धोखा दे सके। जब बिरजू नदी के पास आया, तो उसने तुरंत कुछ अजीब महसूस किया।

"अरे! यह पत्थर रोज़ तो यहाँ नहीं था!" उसने सोचा। वह बहुत चतुर था, उसने एक तरकीब सोची।

बिरजू बोला, "अरे, पत्थर जी! कैसे हो?"
कोई जवाब नहीं आया।

फिर उसने दोबारा कहा, "तुम रोज़ मेरे सवाल का जवाब देते थे, आज क्यों चुप हो?"

मगरमच्छ डर गया कि कहीं बंदर को शक न हो जाए, इसलिए उसने जल्दी से जवाब दिया, "हाँ-हाँ, मैं यहाँ हूँ!"

बस, बिरजू को समझ आ गया कि यह कोई पत्थर नहीं, बल्कि मगरमच्छ है! वह तुरंत पीछे हट गया और एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया। मगरमच्छ को अपनी गलती समझ में आ गई, और वह शर्मिंदा होकर वापस पानी में चला गया।


सीख – अक्लमंद हमेशा जीतता है!

जंगल के सभी जानवर बिरजू की चतुराई की तारीफ करने लगे। इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि –

समस्या से डरना नहीं चाहिए, बल्कि दिमाग से हल निकालना चाहिए।
हमेशा सतर्क रहना चाहिए और किसी भी चालाक दुश्मन से सावधान रहना चाहिए।
चतुराई और हाज़िरजवाबी से बड़ी से बड़ी मुश्किल को हल किया जा सकता है।

बच्चों, क्या तुमने भी कभी अपनी चतुराई से किसी मुसीबत से बचाव किया है? 😊

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