गाँव के बाहर एक पुरानी, टूटी-फूटी हवेली थी, जिसे लोग भूतिया कहते थे। कोई भी रात में वहाँ जाने की हिम्मत नहीं करता था। गाँव के बच्चों को भी सख्त मना था कि वे उस हवेली के पास न जाएँ। लेकिन रोहन, नीलू और सिया बहुत जिज्ञासु थे। उन्हें यह जानने की उत्सुकता थी कि आखिर वहाँ ऐसा क्या है?
एक रात, तीनों दोस्तों ने तय किया कि वे हवेली का रहस्य पता लगाएंगे। हाथ में टॉर्च लेकर वे अंदर घुसे। हवेली के अंदर घुप अंधेरा था, दीवारों पर मकड़ियों के जाले थे, और खिड़कियाँ जोर-जोर से हिल रही थीं। अचानक एक खटाक की आवाज़ आई! तीनों डरकर एक-दूसरे से चिपक गए।
अचानक, एक कोने से सफेद परछाईं निकली! तीनों चीख पड़े और भागने लगे, लेकिन तभी रोहन को कुछ अजीब दिखा। उसने हिम्मत जुटाकर टॉर्च की रोशनी डाली—वह कोई भूत नहीं, बल्कि एक बूढ़े बाबा थे!
बाबा ने बताया कि वे इस हवेली के असली मालिक के पुराने नौकर थे। हवेली के मालिक की अचानक मौत के बाद लोग अफवाहें फैलाने लगे कि यहाँ भूत हैं, और सबने आना बंद कर दिया। बाबा अकेले यहाँ रह रहे थे, लेकिन उनकी मदद करने वाला कोई नहीं था।
तीनों बच्चों ने गाँव जाकर सबको सच्चाई बताई। गाँववालों ने हवेली की सफाई की और बाबा के रहने का इंतज़ाम किया। अब वह हवेली डरावनी नहीं रही, बल्कि गाँव की एक सुंदर जगह बन गई।
सीख: हर डरावनी चीज़ के पीछे कोई न कोई सच्चाई छिपी होती है, बस हिम्मत से सच्चाई को जानने की जरूरत होती है! 👻🔦🏡
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