Saturday, March 22, 2025

विश्वास की ताकत

 छोटे गाँव में रहने वाला मोहन बहुत डरपोक था। उसे लगता था कि वह कुछ भी अच्छा नहीं कर सकता। स्कूल में टीचर सवाल पूछते, तो वह चुप रह जाता। खेलों में भी भाग लेने से डरता था। दोस्त भी उसे चिढ़ाते थे, "तुम कुछ नहीं कर सकते!"

एक दिन गाँव में दौड़ प्रतियोगिता हुई। मोहन को भी भाग लेने का मन था, लेकिन डर लग रहा था। तभी उसके दादा जी ने उसे समझाया, "बेटा, जीतने से पहले खुद पर विश्वास करना ज़रूरी है। अगर तुम सोचोगे कि हार जाओगे, तो हार पक्की है।"

मोहन ने हिम्मत जुटाई और दौड़ में भाग लिया। शुरुआत में वह पीछे रह गया, लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने खुद से कहा, "मैं कर सकता हूँ!" और पूरी ताकत से दौड़ने लगा। आखिरी क्षण में वह सभी को पीछे छोड़कर पहला आ गया!

सभी लोग ताली बजाने लगे। मोहन की आँखों में चमक थी—आज उसे समझ आ गया था कि खुद पर विश्वास रखने से असंभव भी संभव हो सकता है।

उस दिन के बाद, मोहन हर चीज़ में आगे बढ़ने लगा। वह पढ़ाई में भी अच्छा करने लगा और खेलों में भी। कुछ सालों बाद, वही डरपोक लड़का अपने स्कूल का सबसे अच्छा एथलीट बन गया।

सीख: अगर तुम खुद पर भरोसा रखोगे, तो कोई भी मुश्किल तुम्हें नहीं रोक सकती! 💪🌟

No comments:

Post a Comment

आधी रात को रुकने वाली घड़ी

मैरो स्ट्रीट की वह प्राचीन दुकान वहाँ उतने समय से खड़ी थी, जितना किसी को याद भी नहीं। उसकी खिड़कियाँ हमेशा धूल से भरी रहती थीं और उनमें रखी ...